ओमान में इंडियन ड्रीम टूटा – एक रात में सब खत्म!
मेरे ओमान के पत्रकारिता के दिनों में रोज़ एक जैसी खबरें सुनने को मिलती थीं –
- किसी भारतीय मज़दूर का पासपोर्ट जब्त हो गया,
- किसी नर्स का वेतन रोक लिया गया,
- किसी व्यापारी का अपने स्थानीय पार्टनर से विवाद हो गया।
पर एक घटना मुझे आज भी याद है।
मेरे पड़ोस में रहने वाले भारतीय उद्यमी ने अपनी मेहनत, पूंजी और आइडिया से बिज़नेस खड़ा किया था। लेकिन कागज़ों पर सब कुछ उनके ओमानी पार्टनर के नाम था।
एक रात में विवाद हुआ और अगली सुबह तक भारतीय पार्टनर के पास न ऑफिस था, न दुकान, न पैसा। पूरा बिज़नेस कानूनी तौर पर ओमानी पार्टनर के नाम हो गया। परिवार सड़क पर आ गया।
उस दौर में न मेरी कानूनी समझ उतनी थी, न भारतीय एंबेसी ऐसे प्राइवेट विवादों में ज़्यादा मदद कर सकती थी। यह भारत नहीं था कि तुरंत कोर्ट जाकर राहत मिल जाए।
आज का सबक
आज हालात बदले हैं। ओमान अब विदेशी निवेश के लिए खुला है। Residency permits, कंपनी स्ट्रक्चर और foreign ownership अब ज़्यादा क्लियर हैं।
और मैं भी अब Supreme Court का Advocate हूँ, भारत–ओमान के कई अंतरराष्ट्रीय विवादों पर काम कर चुका हूँ।
सीख यही है:
- कभी भी सिर्फ भरोसे पर बिज़नेस न करें।
- सही कॉन्ट्रैक्ट और डॉक्युमेंटेशन ही सुरक्षा है।
- Prevention is better than cure – पहले से लीगल तैयारी ही सबसे बड़ा हथियार है।




